तपस्या
मैंने किस्मत को भी देख लिया घिस-घिसके
आज से 25 वर्ष पहले जब आश्रम की भूमिका मेरे हाथ में आई, तो मैं शेख़चिल्ली की तरह स्वप्न देखा करता था, कि लोग आश्रम में आया करेंगे और दिन-प्रतिदिन आश्रम के भक्तों की संख्या बढ़ती ही जायेगी। - और जब भक्त लोग आयेंगे, तो निश्चय ही वह चढ़ावे भी लेकर आया करेंगे। भाँति-भाँति के पकवान और मिठाइयाँ, लड्डू-पेड़े, बरफी, इत्यादि, मौसम-मौसम के फल, आम, केले, सन्तरे, सेब, अंगूर आदि।
पच्चीस वर्ष तपस्या की, परन्तु कोई सफलता नहीं। कहीं भूले-भटके साल भर में एक-दो व्यक्ति कुछ ले आया करते थे, वह भी कोई संतोषजनक नहीं।
मैं सोचता कि हमारी माँ ने यह कैसा आश्रम खोला है रूखा-सूखा - कि भक्तजन फल, मिठाइयाँ और नग़दी लेकर आते ही नहीं। ऐसे आश्रम का क्या फ़ायदा। कहते हैं श्रीअरविन्द ने बहुत ज्ञान की किताबें लिखी हैं - और माताजी के पास आयोजना की बड़ी महान शक्ति है।
इससे तो परम्परागत मन्दिर और मठ ही अच्छे हैं, जहाँ खाने-पीने को तो खूब आता है। मैं कुछ समय हनुमान मन्दिर के पास रहता था। मन्दिर कुछ भी नहीं था। छोटा-सा स्थान था। एक बड़े पत्थर पर लाल रंग जिसको हनुमान माना जाता था, हर मंगलवार वहाँ कई हज़ार मन लड्डू और मिठाई चढ़ती थी - और मन्दिर के पीछे ऐसा आयोजन था कि दूर-दूर के हलवाई साथ-के -साथ ख़रीद कर लेते जाते थे और जाकर बेचते थे। वही मिठाई फिर-फिर हनुमानजी को चढ़ती रहती थी। कबाड़ी की तरह से हर तरह की मिठाई का भाव निश्चित था।
परन्तु तपस्या में बड़ी शक्ति है ‘सिल्वर जुबिली’ - रजत जयंती पर तपस्या के पच्चीस वर्ष समाप्त हुए और क्या भगवान् की कृपा है - कैसा अनुग्रह है कि अब काफ़ी चढ़ावे आने शुरू हो गए हैं। दो-चार मिठाई के डिब्बे खत्म होते हैं, तो दो-चार और आ जाते हैं। भेंट-पात्र (Offering Box) में भी काफ़ी नकदी आने लग गई है। ईश्वर का धन्यवाद तो है।
परन्तु, ‘‘वाह वे रब्बा पुट्ठियाँ समझाँ बालेया’’ (वाह रे भगवान् उल्टी समझ वाले!) मैंने क़िस्मत को भी देख लिया घिस-घिसके। यदि पच्चीस साल पहले ये मिठाइयाँ और फल मिलते तो मैं जितने आते सब खा सकता था। अब भेजे हैं जाकर, जब मैं कुछ खा ही नहीं सकता - और किसी को देने को जी भी नहीं चाहता। परन्तु बाँटे बग़ैर चारा भी तो नहीं है। क्योंकि सब मिठाई और फल खराब हो जाते हैं। चलो, अब अगली पीढ़ी (Generation) के तो मज़े हो गये - और वे इस दिल्ली आश्रम बनने से खुश होंगे - और खुशी से श्रीअरविन्द और माताजी का योग कर सकेंगे।
तपस्या कर सकेंगे।