शुभास्ते पंथानः
21 जुलाई 76 की सुबह। आठ बजने ही वाले हैं। भारत-पाकिस्तान वायु-यातायात-सेवा का पुनः प्रारम्भ होने जा रहा है। पहली उड़ान के लिए इण्डियन एयर लाइंस का वायुयान तैयार खड़ा है! इस पहली उड़ान द्वारा नवनियुक्त भारतीय-राजदूत श्री आर.के . वाजपेयी प्रस्थान करेंगे।
उन्हें बधाई और विदाई देने श्रीअरविन्द आश्रम-दिल्ली शाखा के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्रनाथ जौहर पहुँचते हैं। वे उनके मिशन की सफलता के लिए शुभ कामनाओं के साथ उन्हें भेंट करते हैं-
डॉ के .आर. श्री निवास आयंगर द्वारा लिखित ‘श्रीअरविन्द: जीवन-चरित्र और इतिहास’ की प्रति तथा श्रीमाँ का आशीष-पुष्प।
श्री वाजपेयी इस भागवत भेंट से पुलकित हैं। ‘कह उठते हैं- ‘हम श्रीअरविन्द के कितने ऋणी हैं, जौहरजी! सचमुच, इस उचित अवसर पर यह भेंट पाकर मैं कृतज्ञ हूँ। मेरे मिशन का यह कितना शुभ आरम्भ है!’
यह यात्रा हमें उस एक और समग्र भारत की ओर ले जाये-जो श्रीअरविन्द के सपनों का भारत है - और जिसकी अमर आत्मा में हम सब अब भी निवास करते हैं!