पावन संस्मरण (भाग 1)
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कृपा


उत्तर प्रदेश की हाल की भयंकर बाढ़ में सैकड़ों गाँव बह गये।

एक गाँव जब बिल्कुल मिटा व बहा जा रहा था तो गाँव में एक अकेली स्त्री अपने घर की छत पर चढ़ गई कि ‘ऊपरवाला’ रक्षा करेगा। थोड़ी देर में उसको ऐसा महसूस हुआ कि वह छत भी हिलने लगी है और वह घर भी बहने लगा। उसने छत के एक कोने से लगी पेड़ की डाल देखी और उसे ही पकड़ लिया और करते-करते पेड़ के ऊपर आ गई। वहाँ बैठकर उसने अपने घर को अपने सामने बहते जाते देखा।

तीन दिन तक वह पेड़ पर रही। जब रक्षा-सेना की नावें उधर से गुज़रीं तो उसने सहायता के लिए पेड़ पर से पुकार लगाई। सुरक्षा सैनिक उसे वहाँ देखकर चकित हो गये। पेड़ पर से नीचे उसे नाव में उतारा गया। कुछ ही मिनटों में उसने एक बच्चे को जन्म दिया।

क्या ही चमत्कार और भगवान् की कृपा थी कि जहाँ सारा गाँव बाढ़ग्रस्त हो गया - बह गया - नामोनिशान भी न रहा! इस बच्चे ने स्त्री की रक्षा की क्योंकि उसको धरती पर आना था।

यह चमत्कार भगवान् श्रीकृष्ण के जन्म के चमत्कार से कम नहीं है पर अभी किसी को यह मालूम नहीं कि ‘वह’ बालक कौन है, वह स्त्री कहाँ है और वह बड़ा होकर जीवन में क्या बनता है - करता है।