चाचा जी की आत्मकथा
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बहाव


मेरे पिता जी इस बात से बड़े दुःखी थे और सोचने लगे कि यूँ तो मेरे लड़के की पढ़ाई कभी ठीक से होगी ही नहीं। वे तो बड़े बड़े स्वप्न देखा करते थे कि अपने ख़ानदान में सब लोग सरकार में बड़े बड़े ऊँचे ओहदों पर हैं और उनकी इच्छा होती थी कि मेरा लड़का भी पढ़-लिखकर किसी ऊँचे पद पर पहुँचे परन्तु यह सब तो क़िश्ती के बहाव पर निर्भर था।