दो शब्द
(भाग-1)
संस्मरण और कहानियाँ हमारे प्रिय चाचा श्री सुरेन्द्रनाथ जी जौहर ‘फ़क़ीर’ के प्रिय विषय रहे हैं। इनके माध्यम से उन्होंने अगणित लोगों का मार्गदर्शन करते हुये उनमें नैतिक, चारित्रिक और आध्यात्मिक भावनाओं का संचार किया।
चाचा जी का स्वयं अपना जीवन विविध घटनाओं से पूर्ण रहा है, उन्होंने जीवन के कितने ही चढ़ावों और उतारों को देखा, साथ ही उन पर अनेक संत-महात्माओं की शिक्षाओं का प्रभाव पड़ा तथा भारतीय संस्कृति के मर्म को उन्होंने भली-भाँति हृदयगंम किया था इस कारण उनके पास अनुभवों का एक विशाल भण्डार और पूँजी थी, जिसे उन्होंने खुले हाथों लोगों में बाँटा और उन्हें लाभान्वित किया।
पूज्य चाचा जी के पावन संस्मरण समय-समय पर ‘श्रीअरविन्द कर्मधारा’ में छपते रहे हैं जो उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर अब पहली बार इन्हें पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। आशा है हमारे पाठकों को इन संस्मरणों से प्रेरणा मिलेगी और वे इनसे लाभान्वित होंगे।